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संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार का अरà¥à¤¥, परिà¤à¤¾à¤·à¤¾, महतà¥à¤µ
à¤à¤¸à¤¾ आहार जिसमें वे सà¤à¥€ चीजें उचित मातà¥à¤°à¤¾ में मौजूद हों जो शरीर निरà¥à¤µà¤¾à¤¹ के लिठआवशà¥à¤¯à¤• है। à¤à¤¸à¥‡ ही à¤à¥‹à¤œà¤¨ से शरीर का à¤à¤²à¥€-à¤à¤¾à¤à¤¤à¤¿ पोषण होता है। उससे परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ शकà¥à¤¤à¤¿ और ताप की उपलबà¥à¤§à¤¿ होती है तथा सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ आयॠकी वृदà¥à¤§à¤¿ होती है। संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार में कारà¥à¤¬à¥‹à¤œ, वसा, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, खनिज लवण, जल तथा सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के विटामिन उचित मातà¥à¤°à¤¾ में होते हैं जिनसे शरीर की सà¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤•ताओं की पूरà¥à¤¤à¤¿ हो जाती है। यदि इन खादà¥à¤¯ ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ में से किसी à¤à¤• ही खादà¥à¤¯ ततà¥à¤µ का सेवन किया जाà¤à¤—ा तो सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• है कि उससे शरीर की अनà¥à¤¯ अनेकों आवशà¥à¤¯à¤•ताà¤à¤ पूरी न हो सकेंगी, फलतः शरीर धीरे-धीरे पूरà¥à¤£ पोषण न मिल पाने के कारण कà¥à¤·à¥€à¤£ हो जाà¤à¤—ा। à¤à¥‹à¤œà¤¨ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का अलग-अलग कारà¥à¤¯ होता है। इनके ठीक अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ में होने से ही हमारा शरीर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ बना रहता है। अतः विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के मिशà¥à¤°à¤£ से बने उस आहार को जो हमारे शरीर को सà¤à¥€ पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ततà¥à¤µ हमारी शारीरिक आवशà¥à¤¯à¤•ताओं के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उचित मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार कहते हैं।
हमारा आहार संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ तब ही कहलायेगा जब हमारी शारीरिक जरूरतों को पूरा कर पायेगा। हमारी शारीरिक जरूरतें कई कारणों पर निरà¥à¤à¤° करती है, जैसे आयà¥, लिंग, जलवायà¥, शारीरिक कारà¥à¤¯ आदि। हमारा संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार à¤à¥€ इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ कारणों पर निरà¥à¤à¤° है।
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार का अरà¥à¤¥
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार वह à¤à¥‹à¤œà¤¨ है, जिसमें विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ à¤à¤¸à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ व समानà¥à¤ªà¤¾à¤¤ में हों कि जिससे कैलोरी खनिज लवण, विटामिन व अनà¥à¤¯ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की आवशà¥à¤¯à¤•ता समà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से पूरी हो सके।
इसके साथ-साथ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का कà¥à¤› अतिरिकà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ हो ताकि अपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ मिलने की अवधि में इनकी आवशà¥à¤¯à¤•ता की पूरà¥à¤¤à¤¿ हो सके। यदि इस परिà¤à¤¾à¤·à¤¾ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से पढ़ें तो पायेंगे कि इनमें 3 मà¥à¤–à¥à¤¯ बातें हैं-
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार आहार में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ शामिल होते हैं।
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार शरीर में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की जरूरतों को पूरा करता है।
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार अपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ मिलने की अवधि के लिये पोषक ततà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है।
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ कà¥à¤¯à¤¾ है - साधारणतः à¤à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ कौन-कौन वसà¥à¤¤à¥ कितनी-कितनी मातà¥à¤°à¤¾ में खाये, जिससे उसकी शारीरिक आवशà¥à¤¯à¤•ताà¤à¤ पूरी हो जायें और वह रोगों से बचा रहकर उतà¥à¤¤à¤® सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और लमà¥à¤¬à¥€ आयॠपà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करें।
रकà¥à¤¤ में कà¥à¤·à¤¾à¤°à¤¤à¥à¤µ और अमà¥à¤²à¤¤à¥à¤µ की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨
मोटे हिसाब से संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨
सबसे ससà¥à¤¤à¤¾ संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨
à¤à¤• परिशà¥à¤°à¤®à¥€ का संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨
पà¥à¤°à¥Œà¤¢à¤¼ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के लिठसंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ दैनिक à¤à¥‹à¤œà¤¨
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾ - संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार उसे कहते हैं, जिसमें सà¤à¥€ à¤à¥‹à¤œà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¯à¤• आवशà¥à¤¯à¤• मातà¥à¤°à¤¾ में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हों ताकि उनसे उपयà¥à¤•à¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में शकà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होने के साथ शरीर की वृदà¥à¤§à¤¿ तथा रख-रखाव संबंधी सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हों और आहार अनावशà¥à¤¯à¤• रूप से मातà¥à¤°à¤¾ में अधिक à¤à¥€ न हो।
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार के घटक
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– घटक
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– घटकों का वरà¥à¤£à¤¨ निमà¥à¤¨ है -
1. जल
जीवन के लिये जल अति आवशà¥à¤¯à¤• है। जीवों के शरीर में जल की मातà¥à¤°à¤¾ 50 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से 85 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ तक होती है। मनà¥à¤·à¥à¤¯ के शरीर का 70 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ à¤à¤¾à¤° जल के कारण है। जल में मà¥à¤–à¥à¤¯ कारà¥à¤¯-
संरचना-जीवदà¥à¤°à¤µà¥à¤¯ का मà¥à¤–à¥à¤¯ अवयव है।
पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का परिवहन।
पसीने इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शरीर के तापकà¥à¤°à¤® को कम करना।
मूतà¥à¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अपशिषà¥à¤Ÿ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का उतà¥à¤¸à¤°à¥à¤œà¤¨-समसà¥à¤¥à¥ˆà¤¤à¤¿à¤•ता बनाये रखना।
2. खनिज लवण
यह शरीर में कारà¥à¤¬à¤¨à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ अकारà¥à¤¬à¤¨à¤¿à¤• अणà¥à¤“ं à¤à¤µà¤‚ आयनों के रूप में होते हैं। शरीर में पाये जाने वाले मà¥à¤–à¥à¤¯ खनिज लवण इस पà¥à¤°à¤•ार हैं।
गंधक - गंधकयà¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¤®à¥€à¤¨à¥‹à¤‚ à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में सहायक हैं।
कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®- फॉसà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸ के साथ मिलकर हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ व दाà¤à¤¤à¥‹à¤‚ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में सहायक।
फॉसà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸- कोशिका कला की संरचना हेतॠफॉसà¥à¤«à¥‹à¤²à¤¿à¤ªà¤¿à¤¡ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£à¥¤
सोडियम तथा पोटैशियम- कोशिका के अनà¥à¤¦à¤° तरल की मातà¥à¤°à¤¾ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करना।
कà¥à¤²à¥‹à¤°à¥€à¤¨- पाचन रस में हाइडà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤• अमà¥à¤² का मà¥à¤–à¥à¤¯ अवयव।
लौह- ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ संवहन, हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– à¤à¤¾à¤—।
आयोडीन- थॉयरॉकà¥à¤¸à¤¿à¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– अवयव, उपापचय पर नियंतà¥à¤°à¤£à¥¤
मैंगनीज- वसीय अमà¥à¤²à¥‹à¤‚ का ऑकà¥à¤¸à¥€à¤•रण।
मॉलिणà¥à¤¡à¥‡à¤¨à¤®- नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¥€à¤•रण में सहायक।
3. कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ
रासायनिक रूप से ये जलयोजित कारà¥à¤¬à¤¨à¤¿à¤• यौगिक या पॉलीहाइडà¥à¤°à¥‰à¤•à¥à¤¸à¥€ à¤à¤²à¥à¤¡à¤¿à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤¸ व कीटोनà¥à¤¸ होते हैं। कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ को शरà¥à¤•रा वाले यौगिक à¤à¥€ कहा जाता है। à¤à¥‹à¤œà¤¨ में यह घà¥à¤²à¤¨à¤¶à¥€à¤² शरà¥à¤•राओं तथा अघà¥à¤²à¤¨à¤¶à¥€à¤² मंड के रूप में होते हैं। अधिकांश कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ शरीर में ऊरà¥à¤œà¤¾ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के काम आते हैं। कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ के कारà¥à¤¯-
यह जीवों में मà¥à¤–à¥à¤¯ ऊरà¥à¤œà¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है।
शà¥à¤µà¤¸à¤¨ के समय गà¥à¤²à¥‚कोस के टूटने से ऊरà¥à¤œà¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है।
अनेक जनà¥à¤¤à¥à¤“ं में रूधिर में गà¥à¤²à¥‚कोस ही रूधिर शरà¥à¤•रा के रूप में होती है। कोशिकाà¤à¤ इसे ऑकà¥à¤¸à¥€à¤•ृत करके ऊरà¥à¤œà¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करती हैं।
सà¥à¤¤à¤¨ गà¥à¤°à¤‚थियों में गà¥à¤²à¥‚कोस तथा गैलेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸ दूध की लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸ शरà¥à¤•रा बनाते हैं।
मांड व गà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤•ोजन के रूप में कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ का शरीर में संगà¥à¤°à¤¹ किया जाता है। इसे संचित ईधन कहते हैं।
4. वसा
वसा कारà¥à¤¬à¤¨, हाइडà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ और ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ के यौगिक हैं, किनà¥à¤¤à¥ इनमें ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ परमाणà¥à¤“ं की संखà¥à¤¯à¤¾ कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ की अपेकà¥à¤·à¤¾ कम होती है। रासायनिक रूप में ये वसा अमà¥à¤² तथा गà¥à¤²à¤¿à¤¸à¤°à¥‰à¤² के à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤° हैं। वसा के कारà¥à¤¯-
शरीर को ऊरà¥à¤œà¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं, à¤à¥‹à¤œà¤¨ का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ घटक है।
ये जीवधारियों में संचित ऊरà¥à¤œà¤¾ के सà¥à¤°à¥‹à¤¤ के रूप में तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे à¤à¤¡à¥€à¤ªà¥‹à¤œ ऊतक की कोशिकाओं में संचित रहते हैं। यहाठपर रहकर ये ताप अवरोधक का कारà¥à¤¯ करते हैं और ठणà¥à¤¡ से बचाते हैं।
विटामिन à¤, डी, तथा ई के लिये विलायक का कारà¥à¤¯ करते हैं।
5. पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨
पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ अधिक आणà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤¾à¤° वाले अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• जटिल रासायनिक यौगिक हैं। ये जीवधारियों में उनके शरीर में मà¥à¤–à¥à¤¯ घटक के रूप में पाये जाते हैं। ये कोशिकाओं के घटकों का संरचनातà¥à¤®à¤• ढांचा बनाते हैं। तथा जीवदà¥à¤°à¤µà¥à¤¯ में पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में पाये जाने वाले ठोस पदारà¥à¤¥ हैं। ये शरीर का 14 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ होते हैं। पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के कारà¥à¤¯-
à¤à¤¨à¥à¤œà¤¾à¤‡à¤® के रूप में, हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ के रूप में।
ये इमà¥à¤¯à¥‚नोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¥à¤¯à¥‚लिनà¥à¤¸ हैं। ये बाहà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को समापà¥à¤¤ करते हैं।
रूधिर में पाये जाने वाले Thrombin तथा Librinogen पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ चोट लगने पर रूधिर का थकà¥à¤•ा बनने में सहायक होते हैं।
परिवहन- कà¥à¤› पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ कà¥à¤› विशिषà¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤•ार के अणà¥à¤“ं से जà¥à¤¡à¤¼à¤•र रूधिर दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उनके परिवहन में सहायक है। उदाहरण के लिये हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ फेफड़ों से ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ लेकर ऊतकों को पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¤à¤¾ है।
पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की कमी से होने वाले रोगों के नाम
6. नà¥à¤¯à¥‚कà¥à¤²à¤¿à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡
ये पà¥à¤¯à¥‚रिन à¤à¤µà¤‚ पाइरिमिडनी नà¥à¤¯à¥‚कà¥à¤²à¤¿à¤“टाइडà¥à¤¸ के रैखिक कà¥à¤°à¤® में विनà¥à¤¯à¤¸à¤¿à¤¤ बहà¥à¤²à¤• हैं। ये बहà¥à¤¤ अधिक आणà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤¾à¤° व जटिल संरचना वाले कारà¥à¤¬à¤¨à¤¿à¤• अणॠहैं। कारà¥à¤¯-
DNA जीवों के आनà¥à¤µà¤‚शिक लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को à¤à¤• पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¤à¤¾ है।
कà¥à¤› नà¥à¤¯à¥‚कà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤¸ सहà¤à¤¨à¥à¤œà¤¾à¤‡à¤® के रूप में कारà¥à¤¯ करते हैं।
जीवों के शरीर की मूल रूपरेखा कà¥à¤›à¥¤ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ही बनायी जाती है।
नà¥à¤¯à¥‚कà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤ªà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨à¥à¤¸ अनà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से अपने समान पदारà¥à¤¥ संशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤¿à¤¤ कर सकते हैं।
7. विटामिन
विटामिन ऊरà¥à¤œà¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ नहीं करते, वरनॠसà¤à¥€ ऊरà¥à¤œà¤¾-समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥€ रासायनिक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं का नियंतà¥à¤°à¤£ करते हैं। इनकी कमी से तà¥à¤°à¥à¤Ÿà¤¿à¤ªà¥‚रà¥à¤£ उपापचय के कारण पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में अनेक रोग होते हैं। इसी कारण इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वृदà¥à¤§à¤¿ ततà¥à¤µ कहते हैं। पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ विटामिन का संशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ नहीं करते, इनकी पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ का à¤à¤•मातà¥à¤° सà¥à¤°à¥‹à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ है।
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार कैसा हो
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त आवशà¥à¤¯à¤•ताओं के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की मातà¥à¤°à¤¾à¤à¤ शामिल होनी चाहिà¤à¥¤
उसमें सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ मिलना चाहिà¤à¥¤
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार à¤à¤¸à¤¾ होना चाहिठकि विशेष पोषक ततà¥à¤µ साथ-साथ हो। जैसे- पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और वसा, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ आदि।
उस आहार में सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µ उचित अनà¥à¤ªà¤¾à¤¨ में होने चाहिà¤à¥¤
आहार उचित मातà¥à¤°à¤¾ में ऊरà¥à¤œà¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने वाला होना चाहिà¤à¥¤
शरीर में à¤à¤•तà¥à¤°à¤¿à¤¤ होने वाले पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की मातà¥à¤°à¤¾ आहार में अधिक होनी चाहिà¤à¥¤
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार में सà¤à¥€ à¤à¥‹à¤œà¥à¤¯ समूहों से à¤à¥‹à¤œà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ शामिल होने चाहिà¤à¥¤
आहार आकरà¥à¤·à¤•, सà¥à¤—नà¥à¤§à¤¿à¤¤, सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ à¤à¤µà¤‚ रूचिकर होना चाहिà¤à¥¤
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार का महतà¥à¤µ
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार के बारे में जानना और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहने के लिये संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार लेना कितना आवशà¥à¤¯à¤• à¤à¤µà¤‚ महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार के महतà¥à¤µ को आप निमà¥à¤¨ बिनà¥à¤¦à¥à¤“ं के माधà¥à¤¯à¤® से समठसकते है-
1. शरीर को पोषण ततà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करना- संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार के कारण शरीर को सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µ जैसे कि कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ, वसा, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, विटामिन, खनिज लवण तथा जल परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ à¤à¤µà¤‚ समà¥à¤šà¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होते है।
2. अपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ मिलने की अवधि में शरीर को अतिरिकà¥à¤¤ पोषक ततà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करना- संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार में पोषक ततà¥à¤µ अतिरिकà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ रहते है। कà¥à¤¦ à¤à¤¸à¤¾ इसलिये ताकि जब कà¤à¥€ à¤à¥‹à¤œà¤¨ परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ न हो सके तो शरीर को इससे किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार की कà¥à¤·à¤¤à¤¿ ना हो। उसे परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में उरà¥à¤œà¤¾ मिलती रहे।
3. शरीर निरà¥à¤®à¤¾à¤£ à¤à¤µà¤‚ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ हेतॠआवशà¥à¤¯à¤•- शरीर संबरà¥à¤§à¤¨ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से à¤à¥€ संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार का अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ महतà¥à¤µ है। आहार के संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ होने पर ही शरीर का ठीक ढंग से निरà¥à¤®à¤¾à¤£ तथा उमà¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° सही शारीरिक विकास होता है।
4. शारीरिक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं का सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥ संचालन- जिस पà¥à¤°à¤•ार किसी विदà¥à¤¯à¥à¤¤ उपकरण को चलाने के लिये बिजली की आवशà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¾ होती है। उसी पà¥à¤°à¤•ार शरीर की समसà¥à¤¤ गतिविधिया ठीक-ठीक चलती रहे, इसके लिये परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में उरà¥à¤œà¥à¤¾à¤¾ की आवशà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¾ होती है, जो संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार से ही पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती है।
5. शरीर की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के लिये- यदि आहार हमारा संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ हो तो इससे शरीर की रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का à¤à¥€ विकास होता है। अत: रोगों से शरीर की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से à¤à¥€ संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार का विशेष महतà¥à¤µ है।
6. धातà¥à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤®à¤¾à¤£ हेतॠआवशà¥à¤¯à¤•- सपà¥à¤¤ धातà¥à¤“ं(रस, रकà¥à¤¤, मांस, मेद, असà¥à¤¥à¤¿, मजà¥à¤œà¤¾,शà¥à¤•à¥à¤°) के पोषक के लिये आहार में सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का समà¥à¤šà¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में होना अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ आवशà¥à¤¯à¤• है।
7. शकà¥à¤¤à¤¿ या ऊरà¥à¤œà¤¾ निरà¥à¤®à¤¾à¤£ हेतॠआवशà¥à¤¯à¤•- शरीर हमारा बलवान या शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ तà¤à¥€ बनता है, जब आहार संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ हो। अत: उरà¥à¤œà¤¾ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार आवशà¥à¤¯à¤• है।
8. समगà¥à¤° सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से आवशà¥à¤¯à¤•- जैसा कि आप अब तक यह समठही चà¥à¤•े हैं कि आहार का संबंध केवल हमारे शरीर से ही नहीं बलà¥à¤•ि यह हमारे मन, à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं और यहाठतक की हमारी आतà¥à¤®à¤¾ पर à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डाले बिना नहीं रहता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आहार का सूकà¥à¤·à¥à¤® पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ होता है, जो हमें आनà¥à¤¤à¤°à¤¿à¤• रूप से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है।
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